शरद पूर्णिमा है बहुत खास क्युकी यहाँ दमा की दवा में मिलती है दुआ भी,

शरद पूर्णिमा का विशेष दिन, जब चंद्र की हर किरण में प्रकृति के सभी गुणों का वास होता है। जब 16 कलाओं से पूर्ण चंद्रमा अपनी शीतल चांदनी से धरा के हर कण को सरोबार करता है। बुधवार को शरद का पूर्ण चंद्र जब अपने विविध गुणों से परिपूर्ण होकर उदित होगा तो हजारों रोगियों को उनके कष्टों से मुक्ति भी देगा। प्रकृति और विज्ञान से पूरिपूर्ण इस विशेष दिन पर आगरा के गुरुद्वारा गुरु का ताल पर हजारों की संख्या में दमा के रोगी आएंगे और जीवन को तकलीफ देने वाली बीमारी से राहत पाएंगे।
सिखों के नौंवे गुरु गुरु तेग बहादुर साहिब के ऐतिहासिक स्थान गुरुद्वारा श्री दुख निवारण साहिब गुरु का ताल पर बुधवार को एक बार फिर दमा, श्वांस एलर्जी के हजारों मरीजों को दवा आ निश्शुल्क वितरण किया जाएगा।

निश्शुल्क सेवा की शुरूआत 1971 में हुई थी

गुरुद्वारा प्रबंधक संत बाबा प्रीतम सिंह के अनुसार गुरुद्वारा का इतिहास करीब साढ़े चार सौ साल पुराना है। एतिहासिक पवित्र स्थल पर 1971 में महाराष्ट्र से संंत साधु सिंह मौनी बाबा आए थे। आयुर्वेदिक औषधियों के ज्ञाता संत साधु सिंह मौनी बाबा ने यहां आने वाले दमा के रोगियों को शरद पूर्णिमा के दिन दवा का वितरण शुरू किया था। शुरूआत में यहां दस से बीस मरीज ही आते थे लेकिन समय के साथ दवा के असर का प्रचार ऐसा हुआ कि वर्तमान में विभिन्न राज्यों के हजारों लोग यहां हर वर्ष आते हैं।

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